Supreme Court's major decision: FIR रद्द करने पर हाईकोर्ट पुलिस को CrPC धारा 41A पालन का आदेश नहीं दे सकती

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India News Live,Digital Desk : सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई उच्च न्यायालय FIR रद्द करता है, तो वह पुलिस को CrPC की धारा 41A (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35) का पालन करने का निर्देश नहीं दे सकती। यह फैसला तेलंगाना हाईकोर्ट के केस पर सुनवाई के दौरान सुनाया गया।

दो जजों की बेंच ने सुनाया आदेश

सुप्रीम कोर्ट की 2 जजों की बेंच — जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा — ने इस मामले में कहा कि यदि FIR रद्द करने की याचिका दायर की गई हो, तो उच्च न्यायालय को पुलिस को CrPC धारा 41A का पालन कराने का आदेश नहीं देना चाहिए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी खुद नियमित रूप से पेश होने पर गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, लेकिन यह अंतरिम राहत FIR रद्द होने की स्थिति में लागू नहीं होगी।

CrPC धारा 41A क्या कहती है?

CrPC धारा 41A, जिसे अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35 कहा जाता है, संज्ञेय अपराधों में गिरफ्तारी से पहले आरोपी को पेश होने का आदेश देती है। इसका मुख्य उद्देश्य मनमानी गिरफ्तारी रोकना और आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया में शामिल करना है।

तेलंगाना HC से जुड़े मामले का असर

तेलंगाना हाईकोर्ट ने पहले एक FIR रद्द करते हुए पुलिस को CrPC 41A का पालन करने का निर्देश दिया था। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई और सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी उच्च न्यायालयों के लिए यह स्पष्ट निर्देश जारी किया कि FIR रद्द होने पर पुलिस को धारा 41A का पालन करने का आदेश नहीं दिया जा सकता।