1000 साल का हुआ गुजरात का ऐतिहासिक 'मोढेरा सूर्य मंदिर': वित्त मंत्रालय ने जारी किया ₹100 का खास स्मारक सिक्का
भारतीय स्थापत्य कला और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बेजोड़ प्रतीक गुजरात स्थित ऐतिहासिक मोढेरा सूर्य मंदिर ने अपने निर्माण के गौरवशाली 1000 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक और सहस्राब्दी अवसर को राष्ट्रीय स्तर पर यादगार बनाने के लिए भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने ₹100 मूल्यवर्ग का एक विशेष स्मारक सिक्का (Commemorative Coin) जारी किया है। आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी की गई आधिकारिक गजट अधिसूचना के अनुसार, यह स्मारक सिक्का देश की प्राचीन वास्तुकला, ज्योतिषीय इंजीनियरिंग और ऐतिहासिक धरोहर को समर्पित किया गया है।
सरकार के इस कदम से देश भर के इतिहास प्रेमियों, मुद्राशास्त्रियों (न्यूमिस्मैटिस्ट्स) और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। मोढेरा का सूर्य मंदिर सदियों से भारत की उन्नत ज्यामितीय संरचना और स्थापत्य प्रतिभा का जीवंत साक्ष्य रहा है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी यह ₹100 का सिक्का भारतीय टकसाल द्वारा अत्यंत सूक्ष्म कारीगरी और उन्नत धातु मिश्रण के साथ ढाला गया है, जो इस मंदिर के सहस्राब्दी सफर '1026 से 2026' के ऐतिहासिक पड़ाव को अमर बनाता है।
कैसा दिखता है ₹100 का यह नया सिक्का: सामने अशोक स्तंभ और पीछे सूर्य मंदिर की भव्य नक्काशी
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किए गए डिजाइन विनिर्देशों के अनुसार, इस नए ₹100 के सिक्के को अत्यंत कलात्मक और गरिमामय रूप दिया गया है। सिक्के के अग्रभाग (सामने वाले हिस्से) के बिल्कुल केंद्र में भारत का राष्ट्रीय प्रतीक 'अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष' उकेरा गया है, जिसके ठीक नीचे देवनागरी लिपि में देश का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य 'सत्यमेव जयते' अंकित है। अशोक स्तंभ के बाईं परिधि पर देवनागरी लिपि में 'भारत' और दाईं परिधि पर अंग्रेजी के बड़े अक्षरों में 'INDIA' लिखा गया है। इसके साथ ही अशोक स्तंभ के ठीक नीचे अंतरराष्ट्रीय अंकों में सिक्के का मूल्य वर्ग '100' और नए भारतीय रुपये का आधिकारिक प्रतीक चिन्ह (₹) खूबसूरती से उकेरा गया है।
सिक्के के पृष्ठभाग (पिछले हिस्से) पर मोढेरा के भव्य सूर्य मंदिर का मनोहारी और विस्तृत स्थापत्य प्रतीक अंकित किया गया है। सिक्के के इस पिछले हिस्से के ऊपरी परिधि पर मंदिर निर्माण से लेकर वर्तमान सहस्राब्दी तक के ऐतिहासिक कालखंड को दर्शाने वाला वर्ष '1026–2026' लिखा गया है। वहीं सिक्के की निचली परिधि पर स्पष्ट अंग्रेजी अक्षरों में "1000 YEARS OF MODHERA SUN TEMPLE, GUJARAT" उत्कीर्ण किया गया है। यह डिजाइन न केवल मंदिर की भव्यता को उजागर करता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारतीय विरासत की अमिट छाप को भी रेखांकित करता है।
सोलंकी राजवंश की बेजोड़ वास्तुकला: पुष्पावती नदी के तट पर स्थित 1026 ईस्वी का वो करिश्मा
गुजरात के मेहसाणा जिले में पुष्पावती नदी के सुरम्य तट पर स्थित मोढेरा का सूर्य मंदिर भारत के सबसे अनूठे और वास्तुशिल्प के चमत्कारिक स्मारकों में गिना जाता है। इस दिव्य मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में वर्ष 1026 ईस्वी के दौरान सोलंकी वंश (जिन्हें चालुक्य वंश भी कहा जाता है) के प्रतापी राजा भीमदेव प्रथम के शासनकाल में कराया गया था। यह मंदिर हिंदू त्रिमूर्ति में ऊर्जा के मुख्य स्रोत भगवान सूर्य को समर्पित है और इसे नागर स्थापत्य शैली के सबसे परिपक्व और भव्य रूप में स्वीकार किया जाता है।
मोढेरा सूर्य मंदिर का पूरा परिसर तीन मुख्य खंडों में विभाजित है—गूढ़मंडप (मुख्य गर्भगृह और प्रार्थना कक्ष), सभामंडप (विशाल खंभों वाला सभा कक्ष) और सूर्यकुंड (एक विशाल ज्यामितीय बावड़ी या बावली)। इस मंदिर की खगोलीय और ज्यामितीय संरचना इतनी सटीक है कि विषुव (इक्विनॉक्स—21 मार्च और 23 सितंबर) के दिनों में जब दिन और रात बराबर होते हैं, तब उगते हुए सूर्य की पहली किरण सीधे मंदिर के गर्भगृह में स्थित सूर्य प्रतिमा के मुकुट के केंद्र में जड़े रत्न पर पड़ती थी, जिससे पूरा गर्भगृह एक अलौकिक स्वर्णिम आभा से जगमगा उठता था। बिना चूने या गारे के, केवल पत्थरों की इंटरलॉकिंग तकनीक से बना यह मंदिर सहस्राब्दियों के भूकंपों और प्राकृतिक थपेड़ों को झेलकर आज भी अपनी अडिग शान के साथ खड़ा है।
देश का पहला सौर ऊर्जा संचालित गांव बना मोढेरा, प्राचीन विरासत और आधुनिक ग्रीन एनर्जी का संगम
मोढेरा का यह सूर्य मंदिर केवल अपने प्राचीन गौरव के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि 21वीं सदी में इसने आधुनिक नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी इतिहास रचा है। केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से मोढेरा को भारत का पहला 24×7 सौर ऊर्जा संचालित गांव (India's First 24x7 Solar-Powered Village) घोषित किया जा चुका है। जहां एक सहस्राब्दी पहले राजा भीमदेव ने सूर्य की किरणों की वंदना के लिए इस अद्भुत पाषाण मंदिर का निर्माण कराया था, वहीं आज उसी मोढेरा के हर घर की छत पर सौर पैनल लगे हैं और पूरे गांव की बिजली की जरूरतें सूर्य देवता के प्रकाश से पूरी होती हैं।
वित्त मंत्रालय द्वारा ₹100 का स्मारक सिक्का जारी किया जाना देश की इस अनमोल विरासत के संरक्षण और पर्यटन संवर्धन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह सिक्का आम प्रचलन की मुद्रा न होकर एक संरक्षित स्मारक सिक्का है, जिसे भारत सरकार की टकसाल द्वारा विशेष स्मारक संग्रहकर्ताओं (कलेक्टर्स) और विरासत प्रेमियों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। यह सिक्का आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाता रहेगा कि भारत का विज्ञान, खगोलशास्त्र और स्थापत्य कला एक हजार वर्ष पहले भी दुनिया के लिए पथ-प्रदर्शक थे।