GenAI Education Report: बच्चों के लिए 'गूगल' बनता जा रहा है ChatGPT, 75% को नहीं पता कि यह कैसे करता है काम; सर्वे में हुआ बड़ा खुलासा

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India News Live,Digital Desk : देश के भविष्य यानी बच्चों के बीच जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (GenAI) का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन क्या हमारे बच्चे इस शक्तिशाली तकनीक को सही मायने में समझ पा रहे हैं? बुधवार को जारी हुई 'Bharat Survey for EdTech 2025' की रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला सच सामने रखा है। सर्वे के मुताबिक, करीब 75% बच्चे GenAI को केवल एक साधारण 'इंटरनेट सर्च इंजन' (जैसे गूगल) मान रहे हैं, जो उनकी समझ और सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय है।

सर्च इंजन और AI के बीच धुंधली होती लकीर

भारत के 10 राज्यों के 12,500 परिवारों पर किए गए इस विस्तृत सर्वे में सामने आया है कि 35% बच्चे अब अपनी पढ़ाई के लिए नियमित तौर पर GenAI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, इसमें एक बड़ा पेंच है। जहाँ 85% बच्चे यह दावा करते हैं कि वे AI को समझते हैं, वहीं उनमें से 72% इसे गूगल जैसे रेगुलर सर्च ऐप्स के बराबर ही आंकते हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इससे AI द्वारा मनगढ़ंत जवाबों (Hallucinations) और इंटरनेट पर उपलब्ध प्रमाणित जानकारी के बीच का फर्क खत्म होता जा रहा है।

रोजाना के इस्तेमाल में GenAI का दबदबा

रिपोर्ट में एक और दिलचस्प पहलू यह है कि कम आय वाले परिवारों के बच्चों के लिए अब GenAI कोई 'लक्जरी' नहीं रह गई है। सर्वे के अनुसार, 96% बच्चे हफ्ते में कई बार और करीब 69% बच्चे रोजाना इन टूल्स का उपयोग कर रहे हैं। जुलाई 2025 से जनवरी 2026 के बीच किए गए इस अध्ययन में 2,500 शिक्षकों की राय भी शामिल की गई है, जो इस तकनीक के बढ़ते प्रभाव की पुष्टि करती है।

गलत जानकारी और लत का बढ़ता जोखिम

तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ ही खतरों की घंटी भी बजने लगी है। सर्वे में शामिल 46% लोगों ने 'गलत जानकारी' (Misinformation) को सबसे बड़ा जोखिम बताया है। बच्चों में इसकी बढ़ती निर्भरता और जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल को लेकर भी अभिभावकों और विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। चूंकि AI कई बार गलत तथ्यों को भी बहुत आत्मविश्वास के साथ पेश करता है, इसलिए बिना सही समझ के इसका इस्तेमाल बच्चों की शिक्षा पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

आखिर क्यों पसंद आ रहा है बच्चों को GenAI?

स्कूल के कामों के लिए GenAI बच्चों का पसंदीदा साथी बनता जा रहा है। आंकड़ों पर नज़र डालें तो:

73% बच्चे: कठिन सवालों को हल करने (Doubt Solving) के लिए इसका उपयोग करते हैं।

48% बच्चे: नई स्किल्स सीखने या भाषा अनुवाद (Translation) के लिए।

32% बच्चे: परीक्षा (Test) की तैयारी के लिए।

बच्चों को यह तकनीक इसलिए पसंद है क्योंकि 45% को इसकी आसान भाषा अच्छी लगती है, जबकि 41% को लगता है कि तुरंत जवाब मिलने से उनका समय बचता है। इसके अलावा 40% बच्चे इसके इंटरैक्टिव फॉर्मेट (बातचीत करने वाले अंदाज) के कायल हैं।