Zepto Warehouse Raid: जेप्टो के वेयरहाउस पर खाद्य सुरक्षा विभाग का बड़ा छापा, अंदर का हाल देख उड़ गए अधिकारियों के होश
क्विक-कॉमर्स सेक्टर में 10 मिनट के अंदर राशन और रोजाना की जरूरत का सामान घर-घर पहुंचाने का दावा करने वाली प्रमुख कंपनी Zepto (जेप्टो) इस समय कानूनी शिकंजे और प्रशासनिक कार्रवाई के घेरे में आ गई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की विशेष टीम ने कंपनी के प्रमुख वेयरहाउस और डार्क स्टोर पर अचानक से औचक निरीक्षण और छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया। जैसे ही प्रशासनिक अधिकारियों का दल वेयरहाउस के परिसर में दाखिल हुआ, वहां का नजारा देखकर खुद अधिकारियों के होश उड़ गए। डार्क स्टोर के अंदर स्वच्छता मानकों की सरेआम अनदेखी की जा रही थी और खाद्य सामग्री के रखरखाव में भारी लापरवाइयां पाई गईं। इस अचानक हुई कार्रवाई से कंपनी के स्थानीय कर्मचारियों और प्रबंधन में हड़कंप मच गया है।
अचानक हुई छापेमारी से हड़कंप और हकीकत का खुलासा
खाद्य सुरक्षा विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि क्विक-कॉमर्स डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के डार्क स्टोर्स में सामान की गुणवत्ता और पैकेजिंग मानकों का उचित पालन नहीं किया जा रहा है। इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष जांच दल का गठन किया गया, जिसने बिना किसी पूर्व सूचना के Zepto के स्थानीय वेयरहाउस पर धावा बोल दिया। छापेमारी के दौरान टीम ने स्टोरेज एरिया, रेफ्रिजरेशन सेक्शन, पैकिंग जोन और डिस्पैच काउंटर का गहनता से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि जिस जगह पर रोजाना हजारों परिवारों के लिए खाने-पीने का सामान पैक किया जा रहा था, वहां बेसिक हाइजीन यानी मूलभूत साफ-सफाई का भी अभाव था। फर्श पर गंदगी, अनुचित तापमान पर रखे गए डेयरी उत्पाद और एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री का अंबार देखकर अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी।
स्वच्छता नियमों की धज्जियां और खराब खाद्य सामग्री
निरीक्षण टीम जब डार्क स्टोर के गहरे हिस्सों में पहुंची, तो वहां पैकेज्ड फूड्स, ब्रेड, फल, सब्जियां और दूध-दही जैसे संवेदनशील उत्पादों को अत्यंत अस्वच्छ परिस्थितियों में पाया गया। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, कई ऐसे खाद्य पदार्थ जो निश्चित तापमान (Cold Storage) में रखे जाने चाहिए थे, उन्हें सामान्य कमरे के तापमान में खुला छोड़ दिया गया था। इससे उनके खराब होने और उनमें बैक्टीरिया पनपने का गंभीर खतरा बना हुआ था। इसके अलावा, कई पैकेट्स पर छपी एक्सपायरी डेट निकल जाने के बाद भी उन्हें बिक्री वाले रैक से अलग नहीं किया गया था। इस बात की पूरी आशंका जताई जा रही है कि जल्दबाजी में होने वाली 10-मिनट डिलीवरी के चक्कर में ऐसे एक्सपायर्ड या खराब सामान भी सीधे उपभोक्ताओं के घरों तक भेजे जा रहे थे। कीड़े-मकोड़ों से बचाव के लिए आवश्यक पेस्ट कंट्रोल के कागजात भी मौके पर संतोषजनक स्थिति में नहीं पाए गए।
खाद्य सुरक्षा विभाग का कड़ा रुख और कानूनी कार्रवाई
कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने अलग-अलग ब्रांड्स और श्रेणी के खाद्य पदार्थों के दर्जनों सैंपल सील किए हैं। इन नमूनों में ब्रेड, पनीर, फ्रोजन स्नैक्स, पैकेज्ड जूस और सूखे मेवे शामिल हैं। इन सभी सीलबंद सैंपलों को विस्तृत जांच के लिए राज्य की मान्यता प्राप्त खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला (Food Testing Laboratory) में भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कंपनी और उसके जिम्मेदार अधिकारियों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSAI Act) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने मौके पर ही कंपनी के डार्क स्टोर मैनेजर को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 24 घंटे के भीतर सभी कमियों को सुधारने और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का कड़ा निर्देश दिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय में मानकों में सुधार नहीं पाया गया, तो डार्क स्टोर का लाइसेंस रद्द करने या उसे पूरी तरह से सील करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
10-मिनट डिलीवरी की होड़ और उपभोक्ता सुरक्षा का संकट
पिछले कुछ समय में भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में 'क्विक कॉमर्स' का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है। महज 10 से 15 मिनट में सामान घर पहुंचाने का वादा करके ये कंपनियां ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। हालांकि, इस अंधाधुंध रेस ने डिलीवरी बॉयज के सुरक्षा मानकों के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा को भी बड़े जोखिम में डाल दिया है। तेज डिलीवरी के दबाव में डार्क स्टोर के कर्मचारी अक्सर सामान की गुणवत्ता, एक्सपायरी डेट और स्वच्छता की जांच करना भूल जाते हैं या जानबूझकर अनदेखा कर देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स कंपनियों को सिर्फ गति पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता और उपभोक्ता की सेहत पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए। सरकारी एजेंसियों द्वारा की जा रही इस तरह की औचक छापेमारी से यह संदेश साफ है कि व्यापारिक लाभ के नाम पर आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ग्राहकों के लिए जरूरी सतर्कता और आगे की राह
इस बड़ी घटना के बाद आम उपभोक्ताओं के बीच भी चिंता की लहर दौड़ गई है। डिजिटल दौर में ऐप के जरिए राशन मंगाना जितना आसान और सुविधाजनक हो गया है, उतना ही सतर्क रहना भी अब बेहद जरूरी हो गया है। खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे जब भी किसी ऑनलाइन डिलीवरी ऐप या डार्क स्टोर से खाद्य सामग्री मंगाएं, तो डिलीवरी लेते समय ही पैकेट पर लिखी मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट और पैकेजिंग की स्थिति को अच्छी तरह जांच लें। यदि पैकेट कटा-फटा हो या उसमें से किसी तरह की दुर्गंध आ रही हो, तो उसे तुरंत रिजेक्ट करें और ऐप के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा विभाग के पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराएं। Zepto के वेयरहाउस पर पड़ा यह छापा सिर्फ एक कंपनी का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे क्विक-कॉमर्स उद्योग के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि वे अपने स्टोरेज सिस्टम और क्वालिटी कंट्रोल प्रोसेस को पारदर्शी और सुरक्षित बनाएं।