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August 19 2026 01:56 am

Income Tax: पहली बार आईटीआर भर रहे हैं? इन 10 जरूरी बातों को न भूलें, वरना हो सकती है बड़ी परेशानी

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नई दिल्ली: आयकर विभाग (Income Tax Department) ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए सभी आईटीआर फॉर्म और एक्सेल यूटिलिटी लाइव कर दिए हैं। अगर आप नौकरीपेशा हैं या पहली बार अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR Filing 2026) दाखिल करने जा रहे हैं, तो किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचें। एक छोटी सी मानवीय भूल या गलत जानकारी आपके रिफंड को रोक सकती है, साथ ही आपको भारी जुर्माना या इनकम टैक्स का नोटिस भी झेलना पड़ सकता है। टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, पहली बार रिटर्न फाइल करने वालों को इन 10 महत्वपूर्ण नियमों और प्रक्रियाओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

1. किसे आईटीआर भरना जरूरी है?

यदि आपकी सालाना आय बेसिक टैक्स छूट सीमा (Exemption Limit) से अधिक है, तो आपके लिए आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य है। इसके अलावा, यदि आपके पास विदेशी संपत्ति है, शेयरों या ईसॉप्स (ESOPs) में निवेश है, बैंक खाते में बड़ी रकम जमा है, साल भर में बिजली बिल ₹1 लाख से अधिक आया है, या विदेश यात्रा पर ₹2 लाख से ज्यादा खर्च किए हैं, तो भी रिटर्न भरना जरूरी है।

2. टैक्सेबल इनकम की सही गणना

टैक्सेबल इनकम तय करने के लिए सबसे पहले अपनी सभी आय स्रोतों (सैलरी, बैंक ब्याज, डिविडेंड आदि) को जोड़ें। इसके बाद पीपीएफ ($PPF$), एनपीएस ($NPS$), लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम, होम लोन के ब्याज और अन्य टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट्स पर मिलने वाली कटौतियों (Deductions) को घटाकर शुद्ध कर योग्य आय की गणना करें।

3. ओल्ड टैक्स रिजीम बनाम न्यू टैक्स रिजीम

आयकर विभाग वर्तमान में दो प्रकार की टैक्स व्यवस्थाएं प्रदान करता है। ओल्ड टैक्स रिजीम में आपको निवेश और भत्तों पर छूट मिलती है, जबकि न्यू टैक्स रिजीम में बिना किसी छूट के कम टैक्स स्लैब का लाभ मिलता है। रिटर्न सबमिट करने से पहले टैक्स कैलकुलेटर के जरिए दोनों विकल्पों की तुलना जरूर कर लें।

4. आईटीआर फाइलिंग की आखिरी तारीख (Deadline)

फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए बिना किसी लेट फीस (Late Fees) के आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 तय की गई है। इस समयसीमा के चूकने के बाद, आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न (Belated Return) दाखिल कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको जुर्माना और ब्याज देना होगा।

5. इन जरूरी दस्तावेजों को रखें पास

आईटीआर फाइलिंग की प्रक्रिया शुरू करने से पहले अपने सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे— फॉर्म 16 (Form 16), पैन कार्ड, बैंक अकाउंट डिटेल्स, निवेश के डिजिटल प्रमाणपत्र, होम लोन का इंटरेस्ट सर्टिफिकेट और इंश्योरेंस की रसीदें एक जगह व्यवस्थित कर लें।

6. Form 16 और AIS/26AS का मिलान है अनिवार्य

फॉर्म 16 आपकी कंपनी द्वारा दिया जाता है जिसमें आपकी सैलरी और कटे हुए टीडीएस ($TDS$) का पूरा ब्योरा होता है। इसके साथ ही, आयकर पोर्टल से अपना एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 26AS जरूर डाउनलोड करें। इसमें आपके बैंक ब्याज, शेयर बाजार के ट्रांजैक्शन और कटे हुए टैक्स की पूरी जानकारी होती है। इन दोनों का आपस में मिलान (Reconciliation) करना सबसे जरूरी स्टेप है।

7. 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन (e-Verification)

याद रखें कि सिर्फ आईटीआर सबमिट कर देना ही काफी नहीं होता। रिटर्न दाखिल करने के बाद 30 दिनों के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है। आप इसे आधार ओटीपी ($OTP$), नेट बैंकिंग या इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) के जरिए आसानी से ऑनलाइन कर सकते हैं। इसके बिना आपका रिटर्न अमान्य घोषित कर दिया जाएगा।

8. ऑफलाइन वेरिफिकेशन का भी है विकल्प

यदि किसी तकनीकी खराबी के कारण आप ऑनलाइन ई-वेरिफिकेशन नहीं कर पा रहे हैं, तो अपने आईटीआर-वी ($ITR-V$) फॉर्म का प्रिंटआउट निकालें, उस पर भौतिक हस्ताक्षर (Signature) करें और उसे डाक द्वारा इनकम टैक्स विभाग के सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर (CPC), बेंगलुरु के पते पर तय समयसीमा के भीतर भेज दें।

9. सही आईटीआर फॉर्म (ITR Form) का चुनाव

अपनी आय के स्रोत के हिसाब से सही फॉर्म चुनना बेहद महत्वपूर्ण है:

ITR-1 (सहज): सैलरी और एक मकान से आय वाले आम नागरिकों के लिए।

ITR-2: बिना किसी व्यावसायिक आय वाले लेकिन कैपिटल गेन या एक से अधिक मकान से कमाई करने वालों के लिए।

ITR-3: बिजनेस या किसी प्रोफेशन से कमाई करने वाले इंडिविजुअल्स के लिए।

ITR-4 (सुगम): प्रिजम्पटिव टैक्स स्कीम (अनुमानित कराधान) का लाभ लेने वाले छोटे कारोबारियों के लिए।

10. पुरानी छूटी हुई आईटीआर भरने की सुविधा

अगर आप पिछले कुछ सालों का टैक्स रिटर्न दाखिल करना भूल गए हैं, तो निराश होने की जरूरत नहीं है। आप ITR-U (Updated ITR) के जरिए पिछले चार असेसमेंट इयर्स का अपडेटेड रिटर्न फाइल कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए आपको टैक्स के साथ कुछ अतिरिक्त पेनल्टी और शुल्कों का भुगतान करना होगा।