महंगाई का डबल अटैक: पेट्रोल के बाद अब डीजल की कीमतों ने छुड़ाए पसीने, इंडस्ट्रियल डीजल के दाम में 22 रुपये प्रति लीटर का भारी इजाफा..
India News Live,Digital Desk : आम जनता पहले से ही पेट्रोल की बढ़ती कीमतों की मार झेल रही थी कि अब डीजल की कीमतों ने भी चौतरफा हमला कर दिया है। तेल कंपनियों ने औद्योगिक यानी इंडस्ट्रियल डीजल (Industrial Diesel) की कीमतों में एकमुश्त 22 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर दी है। इस अचानक हुए इजाफे ने औद्योगिक क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंडस्ट्रियल डीजल के महंगा होने का सीधा असर माल ढुलाई और उत्पादन लागत पर पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में आम जरूरत की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी रिटेल यानी आम पंपों पर बिकने वाले डीजल की कीमतों में इस तरह की कोई बड़ी बढ़ोतरी दर्ज नहीं की गई है, लेकिन इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए यह एक बड़ा झटका है।
क्यों बढ़ी इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतें और क्या होगा इसका असर?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे उतार-चढ़ाव और घरेलू स्तर पर मांग-आपूर्ति के असंतुलन को इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह बताया जा रहा है। इंडस्ट्रियल डीजल का इस्तेमाल मुख्य रूप से बड़ी फैक्ट्रियों, रेलवे, मॉल, अस्पतालों और पावर प्लांट्स में लगे जेनरेटरों में होता है। 22 रुपये प्रति लीटर की यह बढ़ोतरी अब तक की सबसे बड़ी वृद्धियों में से एक मानी जा रही है। जानकारों का कहना है कि जब उद्योगों की लागत बढ़ेगी, तो वे इसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर ही डालेंगे। इससे स्टील, सीमेंट और बिजली उत्पादन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में महंगाई का असर दिखना तय है।
माल ढुलाई और ट्रांसपोर्टेशन पर पड़ेगा सीधा असर
डीजल की कीमतों में इस भारी उछाल का सबसे ज्यादा असर लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर पर पड़ने की आशंका है। थोक में डीजल खरीदने वाले ट्रांसपोर्टर्स और रेलवे जैसे बड़े संस्थानों के लिए अब संचालन खर्च काफी बढ़ जाएगा। यदि थोक खरीदारों के लिए कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में माल ढुलाई के भाड़े में भी बढ़ोतरी की जा सकती है। इससे फल, सब्जियां और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी आने की संभावना बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों की मानें तो ऊर्जा की बढ़ती लागत अर्थव्यवस्था के लिए एक नई चुनौती बनकर उभर रही है।
आम जनता की जेब पर बढ़ेगा महंगाई का बोझ
भले ही यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर रिटेल आउटलेट्स के लिए नहीं है, लेकिन अर्थव्यवस्था की कड़ी आपस में जुड़ी होने के कारण इसका खामियाजा आम आदमी को ही भुगतना पड़ेगा। फैक्ट्रियों में उत्पादन महंगा होने से हर छोटी-बड़ी वस्तु की एमआरपी (MRP) प्रभावित हो सकती है। सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल कीमतों में कमी के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस महंगाई को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाती है।