क्या भारत का सेवा क्षेत्र धीमे पड़ रहा है? जानें पीएमआई रिपोर्ट से सच
India News Live,Digital Desk : देश की अर्थव्यवस्था के लिए सेवा क्षेत्र हमेशा एक मजबूत स्तंभ रहा है, लेकिन सितंबर 2025 में इस क्षेत्र की वृद्धि दर में थोड़ी मंदी देखने को मिली है। एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई (क्रय प्रबंधक सूचकांक) के अनुसार, व्यावसायिक गतिविधियों का सूचकांक सितंबर में 60.9 पर आया, जो अगस्त में 15 साल के उच्च स्तर 62.9 पर था।
हालांकि यह 50 के तटस्थ स्तर से काफी ऊपर है, यानी अर्थव्यवस्था अभी भी विस्तार के क्षेत्र में है, लेकिन विकास की गति कुछ धीमी हो गई है। इस मंदी का मुख्य कारण नए ऑर्डर की धीमी गति और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा माना जा रहा है। इसके साथ ही रोजगार सृजन की दर भी कम हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू मांग और नीतिगत स्थिरता आने वाले महीनों में सेवा क्षेत्र को मजबूती देने में मदद कर सकती है।
पीएमआई में गिरावट और मंदी के संकेत
भारत का सेवा क्षेत्र पिछले कुछ सालों में अर्थव्यवस्था का प्रमुख चालकों में से एक रहा है। सितंबर में विकास दर धीमी रही, जबकि जीएसटी सुधारों और घरेलू मांग बढ़ाने की उम्मीदें थीं। एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई में नई ऑर्डर और व्यावसायिक गतिविधियों में गिरावट ने मंदी के संकेत दिए।
विशेष रूप से, भारतीय सेवाओं के निर्यात (अंतरराष्ट्रीय मांग) में वृद्धि के बावजूद, यह अपने सबसे निचले स्तर पर बनी रही। कंपनियों ने रिपोर्ट किया कि अन्य देशों से सस्ती सेवाओं की बढ़ती प्रतिस्पर्धा भारत की बाहरी बिक्री पर दबाव डाल रही है।
मूल्य और रोजगार का हाल
सकारात्मक पक्ष यह है कि मुद्रास्फीति में थोड़ा सुधार आया है। सितंबर में सेवाओं की कीमतों में वृद्धि धीमी रही, जिससे उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली।
लेकिन रोजगार सृजन की गति चिंताजनक रही। सर्वेक्षण के अनुसार केवल 5% से भी कम कंपनियों ने नई भर्तियाँ कीं, जिससे नए रोजगार अवसर सीमित रहे।
समग्र उत्पादन और आर्थिक दृष्टिकोण
एचएसबीसी इंडिया का समग्र उत्पादन सूचकांक, जो सेवा और विनिर्माण दोनों क्षेत्रों को दर्शाता है, सितंबर में 61.0 पर रहा, जो अगस्त के 63.2 से कम है। यह जून के बाद सबसे कमजोर विस्तार दर है।
पीएमआई यदि 50 से ऊपर है तो यह अर्थव्यवस्था में विस्तार का संकेत देता है। भले ही सेवा क्षेत्र की वृद्धि धीमी हुई है, यह अभी भी विस्तार क्षेत्र में है। यानी देश की अर्थव्यवस्था के मूल तत्व मजबूत हैं।
एचएसबीसी इंडिया के मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, आने वाले महीनों में घरेलू मांग और नीतिगत स्थिरता सेवा क्षेत्र को उबरने में मदद कर सकती है। कुल मिलाकर, सेवा क्षेत्र लचीला और विकासशील है, लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा और अंतरराष्ट्रीय मांग में मंदी इसकी गति को कुछ हद तक रोक रही है।