'अब्दुल पैसा मिला क्या?' जब देव आनंद के गाने के लिए अड़ गया था यह दिग्गज सिंगर, बिना फीस सुर लगाने से कर दिया था साफ इनकार...

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India News Live,Digital Desk :  बॉलीवुड के 'एवरग्रीन' स्टार देव आनंद और सुरों के सरताज मोहम्मद रफी की जोड़ी ने भारतीय सिनेमा को एक से बढ़कर एक सदाबहार नगमे दिए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक वक्त ऐसा भी आया था जब मोहम्मद रफी जैसा दरियादिल इंसान देव साहब की फिल्म के गाने के लिए फीस को लेकर अड़ गया था? यह किस्सा फिल्म 'ज्वेल थीफ' के उस मशहूर गाने से जुड़ा है जिसने इतिहास रच दिया, लेकिन इसकी रिकॉर्डिंग से पहले स्टूडियो में जो ड्रामा हुआ, उसने देव आनंद को भी हैरान कर दिया था।

जब रिकॉर्डिंग रूम में गूंजा सवाल: 'अब्दुल, पैसा मिला क्या?'

किस्सा कुछ यूं है कि फिल्म 'ज्वेल थीफ' के गाने की तैयारी चल रही थी। मोहम्मद रफी माइक्रोफोन के सामने खड़े थे, लेकिन उनके चेहरे पर वो चिर-परिचित मुस्कान नहीं थी। जैसे ही रिकॉर्डिंग शुरू होने वाली थी, रफी साहब अचानक रुके और अपने सेक्रेटरी अब्दुल की तरफ मुड़कर एक ऐसा सवाल पूछा जिसने वहां मौजूद संगीतकार एस.डी. बर्मन और देव आनंद के कान खड़े कर दिए। रफी साहब ने कड़क आवाज में पूछा— "अब्दुल, पैसा मिला क्या?" यह सुनकर हर कोई सन्न रह गया क्योंकि रफी साहब अपनी दरियादिली के लिए जाने जाते थे और अक्सर बिना पैसों की चिंता किए गाना गा देते थे।

देव आनंद भी रह गए थे दंग, आखिर क्या थी वजह

देव आनंद, जो अपनी फिल्मों के संगीत को लेकर बेहद गंभीर रहते थे, उन्हें लगा कि शायद कहीं कोई बड़ी गलतफहमी हो गई है। दरअसल, उस दौर में रॉयल्टी और फीस को लेकर इंडस्ट्री में नए नियम बन रहे थे। रफी साहब का वह सवाल किसी लालच की वजह से नहीं, बल्कि अपने हक और उसूलों की लड़ाई थी। वे चाहते थे कि गायकों को उनकी मेहनत का वाजिब हक मिले। जब तक सेक्रेटरी ने 'हां' में सिर नहीं हिलाया, रफी साहब ने सुर नहीं छेड़े। हालांकि, जैसे ही औपचारिकताएं पूरी हुईं, उन्होंने अपनी जादुई आवाज से वह गाना गाया कि आज भी दुनिया उसे गुनगुनाती है।

अमर हो गई देव आनंद और रफी की यह जुगलबंदी

इस छोटे से विवाद के बाद जब गाना रिकॉर्ड हुआ, तो वह फिल्म 'ज्वेल थीफ' की जान बन गया। देव आनंद के स्टाइल और रफी साहब की आवाज ने पर्दे पर जो जादू बिखेरा, उसने 'दिल पुकारे आ रे आ रे' जैसे गानों को अमर कर दिया। यह किस्सा आज भी बॉलीवुड के गलियारों में सुनाया जाता है कि कैसे एक उसूल पसंद गायक ने सुपरस्टार के सामने भी अपनी शर्तों पर समझौता नहीं किया। देव आनंद ने बाद में अपनी आत्मकथा में भी इस बात का जिक्र किया था कि वे रफी साहब की इस स्पष्टवादिता और प्रोफेशनल रवैये के मुरीद हो गए थे।