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October 06 2026 10:32 pm

BCCI रिव्यू मीटिंग में हुआ फैसला, हरमनप्रीत कौर ने छोड़ी कप्तानी; कबूल किया- 'टीम के लिए दिया खून-पसीना'

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भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सबसे सफल कप्तानों में शुमार हरमनप्रीत कौर के कप्तानी छोड़ने के अप्रत्याशित फैसले ने क्रिकेट जगत में खलबली मचा दी है। यह फैसला किसी अचानक लिए गए व्यक्तिगत विचार का परिणाम नहीं था, बल्कि इसके पीछे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की गुवाहाटी में आयोजित एक हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग की अहम भूमिका रही। इस बैठक में बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों, मुख्य कोच अमोल मजूमदार, उपकप्तान स्मृति मंधाना और खुद हरमनप्रीत कौर के बीच भविष्य के रोडमैप को लेकर गहन चर्चा हुई, जिसके बाद लीडरशिप में बदलाव यानी 'लीडरशिप ट्रांजिशन' का निर्णय सामने आया।

BCCI रिव्यू मीटिंग के बंद दरवाजों के पीछे क्या हुआ?

गुवाहाटी में आयोजित इस समीक्षा बैठक की अध्यक्षता बीसीसीआई के सचिव देवाजीत सैकिया ने की। बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी बड़े आईसीसी टूर्नामेंट्स और भारतीय महिला टीम के अगले चक्र के लिए रणनीतिक योजना तैयार करना था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोर्ड एशियाई खेलों के समाप्त होने का इंतजार कर रहा था ताकि टीम के प्रदर्शन और दीर्घकालिक विजन पर स्पष्ट फैसला लिया जा सके।

बैठक के दौरान बीसीसीआई अधिकारियों ने हरमनप्रीत कौर को स्पष्ट संदेश दिया कि टीम को अब भविष्य की चुनौतियों के लिए एक नई दिशा और नए नेतृत्व की दरकार है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार हरमनप्रीत तीनों प्रारूपों में कप्तानी जारी रखने की इच्छुक थीं और उनका तर्क था कि इस स्तर पर टीम को उनके अनुभव की जरूरत है। लेकिन जब बोर्ड ने भविष्य के रोडमैप और नए खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए कप्तानी परिवर्तन को अपरिहार्य बताया, तो हरमनप्रीत ने खेल और टीम के व्यापक हित को सर्वोपरि मानते हुए सम्मानपूर्वक पद छोड़ने का फैसला स्वीकार कर लिया।

ये कबूल करने में नहीं दिखाई हिचकिचाहट: 'टीम के लिए दिया खून-पसीना'

कप्तानी छोड़ने के बाद हरमनप्रीत कौर ने एक लंबा और बेहद भावुक नोट साझा किया, जिसमें उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के यह स्वीकार किया कि उन्होंने टीम की खातिर अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं और व्यक्तिगत प्रदर्शन तक का त्याग किया।

हरमनप्रीत ने बेबाक अंदाज में कबूल किया कि उन्होंने इस टीम और भारतीय महिला क्रिकेट को अपना सब कुछ दिया—अपना खून, पसीना और समय। उन्होंने खुलकर स्वीकार किया कि कई मौकों पर उन्हें टीम की प्राथमिकताओं को आगे रखने के लिए अपने व्यक्तिगत खेल, अपनी ग्रोथ और अपनी निजी आकांक्षाओं को किनारे रखना पड़ा। एक कप्तान के तौर पर उन्हें कई कड़े और अप्रिय फैसले लेने पड़े, लेकिन उनका हर फैसला केवल इसलिए था ताकि दूसरे खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिले और टीम एकजुट होकर जीत दर्ज कर सके।

दिल में सुकून और टीम पर पूरा भरोसा

अपने बयान में उन्होंने यह भी साफ किया कि भले ही वे भारी मन से कप्तानी छोड़ रही हैं, लेकिन उनके दिल में गहरा सुकून (Peace) है। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि वर्तमान में टीम एक बेहद मजबूत और सही स्थिति में खड़ी है। इस टीम के पास प्रतिभा, मजबूत चरित्र और भविष्य के बड़े सपने हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि बतौर कप्तान उन्होंने अपनी जिम्मेदारी और कर्तव्य पूरी ईमानदारी से निभाया है।

स्मृति मंधाना को कमान सौंपने का खुला रास्ता

हरमनप्रीत कौर के इस फैसले के बाद अब टीम की स्टार ओपनर और उपकप्तान स्मृति मंधाना का तीनों प्रारूपों में भारत की नई नियमित कप्तान बनना तय माना जा रहा है। स्मृति मंधाना काफी समय से उपकप्तान की भूमिका निभा रही हैं और महिला प्रीमियर लीग में भी अपनी सफल कप्तानी का लोहा मनवा चुकी हैं। बोर्ड का मानना है कि स्मृति के पास युवाओं को एकजुट रखने और आधुनिक आक्रामक क्रिकेट को आगे बढ़ाने की पूरी क्षमता है।

कप्तानी का अंत, मगर खिलाड़ी के रूप में जारी रहेगा सफर

37 वर्षीय हरमनप्रीत कौर ने साफ कर दिया है कि उनके कप्तानी के सफर का अंत जरूर हुआ है, लेकिन क्रिकेट के मैदान पर उनका बल्ला चलना बंद नहीं होगा। उन्होंने लिखा कि वे अब बिना किसी कप्तानी के दबाव के केवल 'खेल के प्रति अपने प्रेम' के लिए खेलेंगी। 155 टी20 मैचों में कप्तानी करने और 2025 वनडे विश्व कप जिताने वाली हरमनप्रीत कौर अब बतौर शुद्ध बल्लेबाज और अनुभवी मेंटॉर के रूप में मैदान पर उतरेंगी, जिसका सीधा लाभ आने वाले बड़े मुकाबलों में भारतीय टीम को मिलेगा।