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September 09 2026 03:02 am

बीजिंग में NSA अजीत डोभाल से बोले चीनी FM वांग यी; भारत-चीन सीमा वार्ता में ड्रैगन-हाथी के साथ आने पर बड़ा मंथन

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पूर्वी लद्दाख और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लंबे सैन्य गतिरोध के बाद दोनों एशियाई महाशक्तियों के रिश्तों को पटरी पर लाने की दिशा में एक और बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया गया है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री एवं पोलित ब्यूरो सदस्य वांग यी के बीच बीजिंग में भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों (Special Representatives - SR) की 25वें दौर की बहुप्रतीक्षित वार्ता संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत के साथ संबंधों को नई ऊंचाई देने की पुरजोर वकालत करते हुए कहा कि चीन भारत का 'अच्छा पड़ोसी', भरोसेमंद मित्र और पारस्परिक सफलता का साझीदार बनकर रहना चाहता है। वांग यी ने जोर देकर कहा कि दोनों प्राचीन सभ्यताओं के बीच सौहार्दपूर्ण सह-अस्तित्व से 'ड्रैगन और हाथी का नृत्य' (Dragon and Elephant Dance) हकीकत में बदल सकता है।

'प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि सहयोगी हैं भारत और चीन': अजीत डोभाल का स्पष्ट संदेश

बैठक के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण को बेहद मजबूती और स्पष्टता के साथ सामने रखा। डोभाल ने कहा कि भारत और चीन दोनों ही दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताएं, विशाल आबादी वाले देश और तेजी से बढ़ती प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देश एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी (Competitors) नहीं बल्कि विकास के साझीदार (Partners) हैं। भारतीय एनएसए ने रेखांकित किया कि दोनों देशों के संबंधों में जो धीरे-धीरे सामान्य स्थिति लौट रही है, वह सीधे तौर पर सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने का परिणाम है। डोभाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कजान और तियानजिन में बनी शीर्ष स्तरीय सहमतियों ने द्विपक्षीय संबंधों को एक सकारात्मक और सही दिशा प्रदान की है।

सीमा पर शांति और 2005 के राजनीतिक मार्गदर्शक सिद्धांतों की पुष्टि

लगभग 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव को पूरी तरह समाप्त करने और स्थायी समाधान तलाशने के लिए दोनों पक्षों ने गहन विचार-विमर्श किया। दोनों विशेष प्रतिनिधियों ने वर्ष 2005 में तय किए गए ऐतिहासिक 'राजनीतिक मापदंडों और मार्गदर्शक सिद्धांतों' के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। दोनों देशों ने सहमति जताई कि विशेष प्रतिनिधि तंत्र का उपयोग सीमा विवाद के एक निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान तक पहुंचने के लिए जारी रहेगा। इसके साथ ही, सीमा पर किसी भी संभावित टकराव या गलतफहमी को टालने के लिए विश्वास बहाली के उपायों (CBMs), सीमा प्रबंधन तंत्र को सुदृढ़ करने और चयनित सेक्टरों में सीमा सीमांकन (Delimitation) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। तय हुआ कि विशेष प्रतिनिधि स्तर की अगली 26वीं बैठक वर्ष 2027 में भारत की मेजबानी में आयोजित की जाएगी।

कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमा व्यापार की बहाली का स्वागत

द्विपक्षीय वार्ता में केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि जन-जन के संपर्क और सीमा पार सहयोग को दोबारा जीवित करने पर भी ठोस प्रगति देखी गई। दोनों पक्षों ने नाथू ला दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा के सफल संचालन और भारत-चीन सीमा पर स्थित तीनों पारंपरिक व्यापारिक दर्रों के माध्यम से स्थानीय सीमा व्यापार के दोबारा शुरू होने पर संतोष व्यक्त किया। अजीत डोभाल ने बताया कि इन कदमों से सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले स्थानीय नागरिकों को प्रत्यक्ष और ठोस लाभ पहुंचा है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों को फिर से शुरू करने, पर्यटकों व पत्रकारों के लिए वीजा नियमों को सुगम बनाने और सांस्कृतिक व आर्थिक आदान-प्रदान को चरणबद्ध तरीके से विस्तारित करने पर भी चर्चा हुई।

वांग यी का वैश्विक दृष्टिकोण: 'द्विपक्षीय दायरे से आगे हैं हमारे रिश्ते'

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने बातचीत में कहा कि भारत और चीन के बीच स्वस्थ और स्थिर संबंध न केवल दोनों देशों के 2.8 अरब से अधिक लोगों के मूलभूत हितों की पूर्ति करते हैं, बल्कि पूरे 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की साझा आकांक्षाओं का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। वांग ने कहा कि समय की मांग है कि दोनों देश अपने संबंधों को संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठाकर रणनीतिक ऊंचाई और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखें। उन्होंने दोनों पक्षों से ऐतिहासिक अनुभवों से सीख लेने और सीमा विवाद को समग्र संबंधों में उसके 'उचित स्थान' पर रखने की अपील की ताकि मतभेदों को विवाद में बदलने से रोका जा सके और एशिया व दुनिया में बहुध्रुवीय व्यवस्था को मजबूती मिल सके।

उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात और आगामी ब्रिक्स सम्मेलन की पृष्ठभूमि

वार्ता से पूर्व एनएसए अजीत डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी शिष्टाचार मुलाकात की। इस बैठक में सीमा पर शांति बनाए रखने के साथ-साथ आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने के तौर-तरीकों पर चर्चा हुई। कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, डोभाल का यह बीजिंग दौरा उस समय हुआ है जब आगामी 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में इस बैठक ने दोनों शीर्ष नेताओं के संभावित शिखर सम्मेलन के लिए सकारात्मक कूटनीतिक जमीन तैयार करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।

भविष्य का रोडमैप: विश्वास बहाली और रणनीतिक संवाद पर जोर

बीजिंग में हुई इस 25वें दौर की बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 2020 के बाद भारत-चीन रिश्तों में जमी बर्फ अब तेजी से पिघल रही है। हालांकि, भारतीय पक्ष ने साफ कर दिया है कि समग्र संबंधों की पूरी बहाली सीमा पर पूर्ण शांति और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पहले जैसी स्थिति की निरंतरता पर ही निर्भर करेगी। दोनों देशों ने रणनीतिक संवाद को गहरा करने, बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय बढ़ाने और मतभेदों को संवाद के जरिए सुलझाने का संकल्प लेकर एशिया में नए कूटनीतिक संतुलन की शुरुआत का संकेत दिया है।