Budget 2026: सस्ती सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी, आम जनता और EV यूज़र्स को राहत

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India News Live,Digital Desk : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में आम जनता को राहत प्रदान करने के लिए सीएनजी और बायोगैस की कीमतों में कमी की घोषणा की। इससे सीएनजी वाहनों के ईंधन खर्च में सीधी बचत होगी और सार्वजनिक परिवहन संचालकों को भी राहत मिलेगी।

वित्त मंत्री ने बायोगैस मिश्रित सीएनजी के संबंध में एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि बायोगैस मिश्रित सीएनजी पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क की गणना करते समय बायोगैस की लागत को शामिल नहीं किया जाएगा। इससे इस हरित ईंधन की लागत कम हो सकती है और इसका उपयोग बढ़ सकता है। इसका मतलब है कि आप सस्ती सीएनजी गैस की उम्मीद कर सकते हैं।

दरअसल, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में बायोगैस मिश्रित सीएनजी पर सीमा शुल्क की गणना की विधि में बदलाव की घोषणा की। परिणामस्वरूप, सीमा शुल्क की गणना करते समय अब ​​बायोगैस की कीमत को छूट दी जाएगी।

सीएनजी वाहनों की कीमत बढ़ेगी

सरकार के इस फैसले से बायोगैस आधारित ईंधन की कीमत कम हो जाएगी, जिसका सीधा असर सीएनजी वाहनों और ऑटो उद्योग पर पड़ेगा। इसके अलावा, बजट में इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी की कीमत में भी कमी की घोषणा की गई है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पहले से सस्ती हो जाएगी।

इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी बदलना पहले से कहीं अधिक सस्ता होगा।
इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी की लागत कम होने से अब इनकी कीमत पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वाहनों के बराबर हो जाएगी। इसके अलावा, जिनके पास पहले से ही इलेक्ट्रिक वाहन हैं, उनके लिए पुरानी बैटरी बदलना पहले से कहीं अधिक सस्ता होगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसी भी इलेक्ट्रिक वाहन की कुल लागत का 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले बैटरी का होता है। बजट में लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे प्रमुख खनिजों पर आयात शुल्क में कमी से बैटरी का उत्पादन सस्ता हो जाएगा।

आज बजट पेश करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि लिथियम-आयन सेल के उत्पादन में प्रयुक्त पूंजीगत वस्तुओं पर मूल सीमा शुल्क छूट को अगले वित्तीय वर्ष तक बढ़ा दिया गया है। इससे देश में बैटरी निर्माण कंपनियों की लागत कम होगी और नए निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। इस कदम को इलेक्ट्रिक वाहन और ऊर्जा भंडारण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ग्राहकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इस कदम से बैटरी उत्पादन लागत में 15 से 20 प्रतिशत की कमी आएगी, जिससे उपभोक्ताओं को सीधा लाभ होगा। यही कारण है कि इलेक्ट्रिक वाहनों और इलेक्ट्रिक स्कूटरों की कीमतों में गिरावट आने की संभावना है।