NSE IPO की आहट से सहमा BSE: बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के शेयर 5% टूटे, जानें एनएसई के ₹30,000 करोड़ के मेगा आईपीओ की पूरी डिटेल
भारतीय शेयर बाजार के इतिहास के सबसे बड़े पब्लिक इश्यू (Public Issue) की सुगबुगाहट ने लिस्टेड प्रतिद्वंद्वी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के शेयरों में तहलका मचा दिया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा आईपीओ के लिए ड्राफ्ट दस्तावेज दाखिल करने की संभावनाओं के बीच बुधवार को बीएसई के शेयरों में बिकवाली की होड़ मच गई, जिससे कंपनी के शेयर इंट्रा-डे ट्रेड में लगभग 5 पर्सेंट तक टूटकर ₹3,961 के स्तर पर आ गए।
BSE के शेयरों में गिरावट की मुख्य वजह
मनीकंट्रोल की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज NSE आज ही (बुधवार शाम तक) बाजार नियामक सेबी (SEBI) के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल कर सकता है। अनलिस्टेड मार्केट (ग्रे मार्केट) में एनएसई का वैल्यूएशन लगभग ₹5 लाख करोड़ आंका जा रहा है। इसी वैल्यूएशन के आधार पर इस आईपीओ का साइज करीब ₹30,000 करोड़ होने की उम्मीद है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि एनएसई के मार्केट में आने की खबर से निवेशक अब अपना फंड बीएसई से निकालकर एनएसई के मेगा आईपीओ के लिए सुरक्षित कर रहे हैं, जिसके कारण बीएसई के शेयरों में यह मुनाफावसूली और गिरावट देखी जा रही है।
पूरी तरह 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) होगा यह IPO
यह प्रस्तावित पब्लिक इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि इस आईपीओ के जरिए कोई नया शेयर जारी नहीं किया जाएगा, बल्कि एनएसई के वर्तमान शेयरधारक मिलकर एक्सचेंज में अपनी लगभग 6% इक्विटी (हिस्सेदारी) बेचेंगे।
कौन-कौन से बड़े संस्थान बेच रहे हैं अपनी हिस्सेदारी? Table
मर्चेंट बैंकिंग सूत्रों के अनुसार, देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक SBI (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) इस आईपीओ में सबसे बड़ा सेलिंग शेयरधारक बनने जा रहा है। हिस्सेदारी बेचने वाले प्रमुख निवेशकों की सूची नीचे दी गई है:
| शेयरधारक (Selling Shareholders) | संभावित बिक्री (अधिकतम शेयर्स) |
|---|---|
| स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) | 24.75 मिलियन (2.47 करोड़) |
| एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरिशस) लिमिटेड | 16.00 मिलियन (1.60 करोड़) |
| कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) | 11.87 मिलियन (1.18 करोड़) |
| अरंडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरिशस) प्राइवेट लिमिटेड | 11.24 मिलियन (1.12 करोड़) |
| बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) | ~11.00 मिलियन (1.10 करोड़) |
| स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SHCIL) | ~11.00 मिलियन (1.10 करोड़) |
| जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re) | 10.65 मिलियन (1.06 करोड़) |
| द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड | 10.50 मिलियन (1.05 करोड़) |
| नेशनल इंश्योरेंस व यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस | ~6.00 मिलियन प्रत्येक (60-60 लाख) |
10 साल पुराना है इतिहास: 2016 में फेल हुआ था पहला प्रयास
यह पहली बार नहीं है जब एनएसई बाजार में लिस्ट होने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले साल 2016 में एनएसई ने करीब ₹10,000 करोड़ जुटाने के लिए सेबी के पास दस्तावेज जमा किए थे। हालांकि, उस समय एक्सचेंज के कॉर्पोरेट गवर्नेंस (कामकाज के संचालन) और बहुचर्चित 'को-लोकेशन मामले' (Co-location Case) के विवादों के कारण सेबी ने इस आईपीओ को मंजूरी नहीं दी थी और इसे रोक दिया था।
अब करीब एक दशक बाद, एनएसई ने अपनी पूरी तैयारी पुख्ता कर ली है। इस मेगा आईपीओ को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए एक्सचेंज ने 20 बड़े मर्चेंट बैंकरों, कानूनी सलाहकारों और वित्तीय मध्यस्थों की एक विशाल टीम को नियुक्त किया है।