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August 16 2026 01:14 am

पीएम-किसान योजना पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला! साल 2030-31 तक के लिए विस्तार, ₹3.15 लाख करोड़ के बजट को मंजूरी से 9 करोड़ से ज्यादा किसानों को सीधा फायदा

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देश के करोड़ों किसानों के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) की बैठक में 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' (PM-KISAN) योजना को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना को आने वाले वर्षों के लिए जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत वित्त वर्ष 2026-27 से लेकर 2030-31 तक की अवधि के लिए पीएम-किसान योजना के विस्तार पर मुहर लगाई गई है। सरकार के इस कदम से देश के 9 करोड़ से अधिक छोटे और सीमांत किसानों को सीधे तौर पर आर्थिक सुरक्षा और मजबूती मिलती रहेगी, जिससे कृषि क्षेत्र को एक नया संबल मिलेगा।

₹3.15 लाख करोड़ का विशाल वित्तीय पैकेज और बजट आवंटन

कृषि क्षेत्र को देश की रीढ़ मानते हुए मोदी सरकार ने इस योजना के सुचारू संचालन के लिए भारी-भरकम बजट का प्रावधान किया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पीएम-किसान योजना के इस नए विस्तार चरण (2026-27 से 2030-31) के लिए कुल ₹3.15 लाख करोड़ के वित्तीय परिव्यय (Financial Outlay) को स्वीकृति दी गई है। यह पूरी राशि केंद्र सरकार द्वारा शत-प्रतिशत वित्तपोषित (100% Centrally Funded Scheme) होगी। सरकार का यह बड़ा वित्तीय निवेश इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि देश के अन्नदाताओं की आर्थिक समृद्धि और वित्तीय स्थिरता सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है।

कैसे मिलता है किसानों को योजना का लाभ? (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण)

फरवरी 2019 में शुरू की गई पीएम-किसान योजना के तहत पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष ₹6,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह पूरी राशि तीन समान किस्तों में (प्रत्येक किस्त ₹2,000 की) सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है। धन के इस वितरण के लिए सरकार पूरी तरह से पारदर्शी और डिजिटल 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' (DBT) प्रणाली का उपयोग करती है, जिससे बीच में किसी भी बिचौलिए की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाती है। अब तक इस योजना के माध्यम से देश के 9.49 करोड़ से अधिक किसानों को विभिन्न किस्तों के जरिए कुल ₹4.47 लाख करोड़ से अधिक की राशि सीधे उनके खातों में पहुंचाई जा चुकी है, जो दुनिया के सबसे बड़े डीबीटी कार्यक्रमों में शुमार है।

नीति आयोग (NITI Aayog) की रिपोर्ट और कृषि क्षेत्र पर इसका सकारात्मक असर

विभिन्न स्वतंत्र संस्थानों और नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) द्वारा किए गए मूल्यांकनों से यह साबित हुआ है कि पीएम-किसान योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने में अभूतपूर्व भूमिका निभाई है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 92 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों ने यह माना है कि उन्होंने इस वित्तीय सहायता का उपयोग मुख्य रूप से कृषि गतिविधियों, बीज, उर्वरक और कृषि निवेश के लिए किया है। इसके अलावा, लगभग 85 प्रतिशत किसानों ने स्वीकार किया है कि इस योजना के कारण उनकी कृषि आय में सुधार हुआ है और साहूकारों या अनौपचारिक स्रोतों से कर्ज लेने की उनकी निर्भरता काफी हद तक कम हुई है। पिछले कुछ वर्षों में देश में खाद्यान्न उत्पादन और कृषि उत्पादकता में आई तेज बढ़ोतरी में भी इस योजना का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

महिला किसानों का सशक्तिकरण और डिजिटल इंडिया का कमाल

पीएम-किसान योजना के तहत देश की महिला किसानों को भी विशेष रूप से सशक्त बनाया गया है। अब तक योजना के तहत महिला लाभार्थियों के खातों में ₹1.06 लाख करोड़ से अधिक की राशि ट्रांसफर की जा चुकी है, और लगभग हर चार में से एक लाभार्थी महिला किसान है। यह योजना 'डिजिटल इंडिया' की सफलता का भी एक बेहतरीन उदाहरण है। आधार-आधारित प्रमाणीकरण (Aadhaar Authentication), डिजिटल सत्यापन और मजबूत डेटाबेस के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि केवल पात्र किसानों तक ही इसका लाभ पहुंचे। इस पूरी प्रणाली ने पारदर्शिता और जवाबदेही के नए मानक स्थापित किए हैं।

किसानों के भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा यह फैसला

पीएम-किसान योजना के इस पांच वर्षीय विस्तार से न केवल किसानों को समय पर वित्तीय मदद मिलती रहेगी, बल्कि वे आधुनिक कृषि तकनीकों, बेहतर बीजों और सिंचाई के साधनों में बिना किसी आर्थिक दबाव के निवेश कर सकेंगे। प्राकृतिक आपदाओं या मौसम के उतार-चढ़ाव के जोखिमों से निपटने में भी यह योजना किसानों को एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करती है। सरकार के इस दूरदर्शी फैसले से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी, जिससे देश के 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने में अन्नदाताओं की भागीदारी और अधिक सशक्त बनेगी।