अमेरिका-ईरान जंग का आपकी जेब पर चौतरफा वार, खुदरा के बाद अब थोक महंगाई भी 9.87% के पार
थोक महंगाई के आंकड़े: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) संकट, होर्मुज जलडमरूमध्य की प्रभावी नाकेबंदी और खाने-पीने की चीजों में आए भारी उछाल ने आम जनता के घरेलू बजट को बुरी तरह बिगाड़ दिया है। वैश्विक स्तर पर लगातार बिगड़ते हालातों और अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान के बीच जारी महीनों लंबे तनाव का सीधा और नकारात्मक असर भारत के थोक बाजार पर देखने को मिला है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 के महीने में देश की थोक मुद्रास्फीति (WPI आधारित महंगाई) बढ़कर 9.87 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो इससे पिछले महीने यानी मई में 9.68 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
खनिज तेल, ईंधन और खाद्य वस्तुओं ने बढ़ाईं मुश्किलें
मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में आई इस बड़ी तेजी के पीछे मुख्य रूप से खनिज तेल (पेट्रोलियम उत्पाद), खाद्य वस्तुएं, मैन्युफैक्चरर मेटल और केमिकल प्रोडक्ट्स की कीमतों में हुआ इजाफा जिम्मेदार है।
ईंधन और बिजली (Fuel & Power): इस कैटेगरी में थोक महंगाई जून में 27.41 प्रतिशत रही, जो हालांकि मई के 30.33 प्रतिशत के मुकाबले थोड़ी कम है, लेकिन अभी भी बेहद ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।
खाद्य वस्तुएं (Food Articles): खाने-पीने की चीजों की थोक महंगाई में जून के दौरान बड़ा उछाल आया और यह मई के 3.60 प्रतिशत से सीधे बढ़कर 5.49 प्रतिशत पर जा पहुंची।
अन्य श्रेणियां: गैर-खाद्य वस्तुओं (Non-Food Articles) में थोक महंगाई 11.07 प्रतिशत के उच्च स्तर पर रही, जबकि खनिज श्रेणी में यह 9.45 प्रतिशत दर्ज की गई।
खुदरा महंगाई (CPI) भी 17 महीने के रिकॉर्ड हाई पर
बिजनेस विश्लेषक Deepak Kumar की रिपोर्ट के अनुसार, थोक बाजार के साथ-साथ आम जनता से सीधे जुड़ी खुदरा या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति भी जून में बढ़कर 17 महीने के उच्च स्तर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जबकि मई में यह 3.93 प्रतिशत पर थी। ध्यान देने वाली बात यह है कि नए बेस ईयर (आधार वर्ष) 2024 वाली सीरीज के लागू होने के बाद यह पहली बार है जब खुदरा महंगाई ने 4 प्रतिशत के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार किया है।
जानिए बाजार में क्या-क्या हुआ सबसे ज्यादा महंगा?
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जून के महीने में देश के भीतर वस्तुओं की कीमतों में भारी असमानता देखी गई:
सर्वाधिक महंगे उत्पाद: जून में सबसे अधिक महंगाई चांदी, सोना, हीरा, प्लैटिनम के आभूषण, अदरक, टमाटर, किशमिश और मुनक्का की कीमतों में दर्ज की गई।
कम महंगाई वाली वस्तुएं: इसके विपरीत आलू, मटर, कार, जीप, जीरा, मोटरसाइकिल और स्कूटर जैसी वस्तुओं की कीमतों में अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी देखी गई।
राज्यों का हाल: यदि राज्यों के स्तर पर तुलना करें, तो तेलंगाना में सबसे अधिक 6.36 प्रतिशत और मिजोरम में सबसे कम 1.63 प्रतिशत खुदरा महंगाई दर्ज की गई है।
आरबीआई (RBI) का अनुमान और ब्याज दरों पर असर
केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को खुदरा महंगाई को 4 प्रतिशत (2% ऊपर या नीचे के मार्जिन के साथ) के दायरे में बनाए रखने का वैधानिक लक्ष्य दिया हुआ है। बढ़ती अनिश्चितता के बीच, केंद्रीय बैंक ने जून में हुई अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की समीक्षा बैठक में नीतिगत ब्याज दरों (रेपो रेट) में कोई बदलाव नहीं किया था।
हालांकि, बदलती वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने कुल मुद्रास्फीति अनुमान को 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में हो रही लगातार वृद्धि का सीधा असर घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे आने वाले समय में माल ढुलाई और उत्पादन की इनपुट लागत (लागत मूल्य) में और इजाफा हो सकता है।