अखिलेश ने खोला सरप्राइज का राज, बताया क्यों धनराज नथवानी को बनाया सपा का प्रत्याशी
उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में उद्योगपति धनराज परिमल नथवानी ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। सपा की इस अप्रत्याशित चाल ने राजनीतिक पंडितों के साथ-साथ विपक्षी खेमे को भी चौंका कर रख दिया। जहां प्रो. रामगोपाल यादव के नाम की चर्चा पहले से तय मानी जा रही थी, वहीं दूसरे प्रत्याशी के तौर पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट धनराज नथवानी का नाम सामने आना सबसे बड़ा सरप्राइज पैकेज साबित हुआ। इस राजनीतिक दांव के बाद चौतरफा उठ रहे सवालों का जवाब खुद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बेबाकी से मीडिया के सामने रखा। उन्होंने साफ लफ्जों में बताया कि आखिर पार्टी ने एक बड़े कॉर्पोरेट चेहरे को उच्च सदन भेजने का फैसला क्यों किया और इसके पीछे प्रदेश के आर्थिक विकास की क्या दूरगामी योजनाएं हैं।
अखिलेश यादव ने नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट किया कि आज का दौर आर्थिक प्राथमिकताओं और औद्योगिक विस्तार का है। केंद्र और राज्य सरकारें लगातार प्रदेशों में बड़े निवेश लाने और औद्योगिकीकरण की बात करती हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी भी उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने और राज्य में उद्योग-धंधों को मजबूती देने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सपा मुखिया का तर्क था कि कॉर्पोरेट जगत के लोगों का जुड़ना सीधे तौर पर सूबे के विकास में अहम भूमिका निभाएगा।
अखिलेश यादव ने बताया कॉरपोरेट जगत और समाजवाद का नया तालमेल
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए अपने फैसले का वैचारिक पक्ष भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ आने से प्रदेश में बड़े प्रोजेक्ट्स और आधुनिक तकनीकों को आकर्षित करने में मदद मिलती है। अखिलेश ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि जो लोग समाजवाद को केवल पुरानी रूढ़िवादिता के चश्मे से देखते हैं, उन्हें डॉ. राममनोहर लोहिया के विचारों को गहराई से पढ़ना चाहिए। लोहिया जी का समाजवाद कभी भी समृद्धि या उत्पादन के विस्तार का विरोधी नहीं रहा, बल्कि वह यह सिखाता है कि देश और प्रदेश में धन तथा खुशहाली कैसे लाई जाए और फिर उसका न्यायसंगत वितरण हो।
अखिलेश ने आगे कहा कि आज देश के अधिकांश कॉर्पोरेट घरानों और उद्योग जगत पर चुनिंदा राजनीतिक दलों का वर्चस्व दिखता है। ऐसे माहौल में समाजवादी पार्टी ने नई पीढ़ी, आधुनिक सोच और उद्योग जगत से सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से एक प्रतिनिधि को राज्यसभा भेजने का फैसला किया। धनराज नथवानी की प्रोफाइल युवाओं को कनेक्ट करने और प्रदेश में व्यावसायिक गतिशीलता को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह अनुकूल बैठती है।
कौन हैं धनराज परिमल नथवानी और क्या है उनका औद्योगिक दायरा?
धनराज परिमल नथवानी देश के प्रमुख युवा कॉर्पोरेट लीडर्स और खेल प्रशासकों में गिने जाते हैं। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) में ग्रुप प्रेसिडेंट के अहम पद पर कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे रिलायंस न्यू एनर्जी और ग्रुप की कई अग्रणी कंपनियों के निदेशक मंडल में शामिल हैं। जामनगर स्थित दुनिया के सबसे बड़े तेल शोधक परिसर के प्रबंधन, रिलायंस जियो के देशव्यापी दूरसंचार नेटवर्क विस्तार और कई मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को धरातल पर उतारने में उनकी रणनीतिक भूमिका रही है।
लंदन के रीजेंट्स बिजनेस स्कूल से इंटरनेशनल बिजनेस में डिग्री और कॉर्पोरेट लॉ व पब्लिक रिलेशंस में उच्च प्रबंधन शिक्षा हासिल करने वाले धनराज नथवानी खेल जगत में भी एक बड़ा मुकाम रखते हैं। वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के अध्यक्ष हैं और अहमदाबाद स्थित विश्व के सबसे बड़े 'नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम' के निर्माण व संचालन तंत्र से गहराई से जुड़े रहे हैं। इसके अतिरिक्त, वे गुजरात स्टेट फुटबॉल एसोसिएशन के प्रमुख के साथ-साथ प्रसिद्ध द्वारकाधीश देवस्थान प्रशासनिक समिति के उपाध्यक्ष के रूप में धार्मिक व सामाजिक कार्यों से भी जुड़े हैं।
पिता एनडीए सांसद तो बेटा सपा प्रत्याशी, संसद में दिखेगी अनोखी जोड़ी
धनराज नथवानी के राज्यसभा नामांकन के साथ ही भारतीय संसदीय इतिहास में एक दिलचस्प अध्याय जुड़ने जा रहा है। उनके पिता परिमल नथवानी खुद कॉर्पोरेट जगत के कद्दावर रणनीतिकार हैं और वर्तमान में झारखंड से एनडीए के समर्थन से राज्यसभा सांसद हैं। परिमल नथवानी का यह संसद के उच्च सदन में चौथा कार्यकाल है।
अब पिता के एनडीए खेमे में होने और बेटे के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुने जाने के बाद संसद के गलियारों में पिता-पुत्र की एक बेहद अनोखी और बहुचर्चित जोड़ी देखने को मिलेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नथवानी परिवार का सभी प्रमुख दलों के शीर्ष नेतृत्व के साथ मधुर और आत्मीय संबंध रहा है, जिसका सीधा असर उनके सर्वमान्य स्वीकार्यता पर साफ झलकता है।
यूपी राज्यसभा चुनाव का गणित और अखिलेश का रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चल रही चुनावी प्रक्रिया में संख्याबल के लिहाज से समाजवादी पार्टी बेहद मजबूत स्थिति में है। विधानसभा में सपा के पास अपने दम पर दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त विधायक मौजूद हैं। प्रो. रामगोपाल यादव के छह दशक लंबे संसदीय अनुभव और धनराज नथवानी के कॉर्पोरेट प्रभाव को एक साथ आगे लाकर सपा ने अपनी राजनीतिक सीमाओं को सिर्फ पारंपरिक वोटबैंक तक सीमित न रखने का कड़ा संदेश दिया है।
सपा मुख्यालय में पत्रकारों ने जब तीसरे उम्मीदवार को उतारने और क्रॉस वोटिंग को लेकर सवाल पूछा, तो अखिलेश यादव ने मुस्कुराते हुए सस्पेंस बरकरार रखा। सपा मुखिया ने स्पष्ट कहा कि संख्याबल को लेकर गहन आंतरिक मंथन जारी है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि सत्ता पक्ष के भी कई विधायक लगातार उनके संपर्क में हैं, लेकिन सवाल यह है कि उन सभी को किस तरह से समायोजित किया जाए। धनराज नथवानी के मैदान में उतरने से जहां सपा कार्यकर्ताओं में तकनीकी और औद्योगिक विकास को लेकर नया उत्साह देखा जा रहा है, वहीं विपक्षी खेमे में चुनावी समीकरणों को लेकर भारी असमंजस की स्थिति बन गई है।