2026 के बाद बदल सकता है लोकसभा का चेहरा, जानिए क्यों 543 सीटों पर ही होते हैं चुनाव
India News Live,Digital Desk : जिस तरह हमारे देश में अलग-अलग मामलों के लिए कानून हैं, उसी तरह लोकसभा सीटों के बंटवारे के भी कुछ नियम हैं। जिस राज्य की जनसंख्या जितनी ज़्यादा होगी, उसे उतनी ही ज़्यादा सीटें मिलेंगी। भारतीय संविधान के अनुसार, लोकसभा में अधिकतम 552 सीटें हो सकती हैं, लेकिन चुनाव 543 सीटों पर ही क्यों होते हैं? पिछले कुछ सालों में नए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भी बने हैं, लेकिन फिर भी लोकसभा में 543 सीटें ही हैं, ऐसा क्यों है? आइए जानते हैं इसके पीछे का सच।
लोकसभा में कितने सदस्य हो सकते हैं?
भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोकसभा इसका निचला सदन है। यह देश की जनता का प्रतिनिधित्व करता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 81 के अनुसार, लोकसभा में अधिकतम 552 सदस्य हो सकते हैं। इनमें से 530 सीटें राज्यों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि 20 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा, दो सीटें एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए मनोनयन द्वारा भरी जा सकती हैं।
चुनाव केवल 543 सीटों पर ही क्यों होते हैं?
लेकिन, अब सवाल यह है कि अगर संविधान में 552 सीटों का प्रावधान है, तो यह 543 सीटों पर क्यों रुक गया? तो आपको बता दें कि 1952 में पहली लोकसभा में 497 सीटें थीं। नए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के गठन के साथ सीटों की संख्या बढ़ती गई। 1956 में संविधान संशोधन के बाद, केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 20 सीटें जोड़ी गईं। इससे अधिकतम सीमा 520 हो गई। फिर, 1976 तक सीटें बढ़कर 545 हो गईं, जिनमें 543 निर्वाचित और 2 मनोनीत (एंग्लो-इंडियन) सीटें शामिल थीं।
सीटों में वृद्धि की संभावना
1976 में परिसीमन पर अस्थायी रोक लगा दी गई थी, जो 2001 तक लागू रही। 91वें संविधान संशोधन के तहत इस रोक को 2026 तक बढ़ा दिया गया। इसका मतलब है कि 2026 तक लोकसभा सीटों की संख्या 543 ही रहेगी। लेकिन, 2026 के परिसीमन के बाद संभावना है कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ सकती है। आपको बता दें कि जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या समायोजित करने की प्रक्रिया को परिसीमन कहा जाता है। इतना ही नहीं, माना जा रहा है कि परिसीमन के बाद 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव 543 की बजाय 750 सीटों पर हो सकते हैं। हालांकि, सही आंकड़ा परिसीमन के बाद ही सामने आएगा।