600 साल पुराना रूस का ज्वालामुखी जगा 8.8 तीव्रता के भूकंप का खौफनाक असर, 6 KM ऊपर उठी राख

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India News Live,Digital Desk : 30 जुलाई, 2025 को रूस के सुदूर पूर्व में आए 8.8 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने एक ऐसे खौफनाक सच को उजागर कर दिया है, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। इस महा भूकंप ने कामचटका प्रायद्वीप के पूर्वी तट पर स्थित क्रशेनिकोव ज्वालामुखी को 600 साल की गहरी नींद से जगा दिया है। क्रोनोट्स्की नेचर रिजर्व में स्थित यह विशालकाय ज्वालामुखी, जो 1463 से सुप्त था, 3 अगस्त, 2025 को अचानक फट पड़ा और धधकते लावा और जहरीली राख का सैलाब उगलने लगा।

6 KM ऊँचा राख का गुबार और नारंगी अलर्ट:
ज्वालामुखी से निकले राख के गुबार ने आसमान को चीरते हुए लगभग 6 किलोमीटर (6000 मीटर) की ऊंचाई तक अपना जाल फैला दिया है। इस भयावह दृश्य के कारण, रूसी विमानन प्राधिकरणों ने प्रभावित क्षेत्र को "ऑरेंज कोड" श्रेणी में रखा है। इस चेतावनी का मतलब है कि विमानों को इस खतरनाक क्षेत्र से गुजरने से सख्त मना किया गया है, क्योंकि उड़ानों के लिए यह एक गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। राख का यह बादल अब प्रशांत महासागर की ओर 75 किलोमीटर से अधिक पूर्व की ओर फैल चुका है। ज्वालामुखी के उत्तरी गड्ढे से निकलने वाली राख, गैस और भाप के साथ-साथ दरारों से लावा भी लगातार बाहर निकल रहा है।

वैज्ञानिकों की चिंता और 600 साल का इतिहास:
भूवैज्ञानिकों का मानना है कि 30 जुलाई को आए 8.8 तीव्रता के भूकंप ने इस ज्वालामुखी के अंदर सोई हुई शक्तियों को सक्रिय कर दिया। 1463 से सुप्त क्रशेनिकोव ज्वालामुखी, जिसका नाम रूसी खोजकर्ता स्टीफन क्रैशेनिकोव के नाम पर रखा गया है, एक जटिल स्ट्रैटोज्वालामुखी है जो एक बड़े काल्डेरा (ज्वालामुखी का धंसा हुआ ऊपरी हिस्सा) के भीतर स्थित है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस ज्वालामुखी में पिछले 10,000 वर्षों में कम से कम 31 बार विस्फोट हो चुका है, लेकिन 600 साल का यह अंतराल अभूतपूर्व था।

प्रशांत अग्नि वलय का हिस्सा और निगरानी:
रूस का कामचटका प्रायद्वीप प्रशांत महासागर के "अग्नि वलय" (Ring of Fire) का हिस्सा है, जो दुनिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखी और भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है। क्रशेनिकोव ज्वालामुखी, जो 1856 मीटर (6089 फीट) ऊंचा है, इसी क्षेत्र में स्थित है। इस घटना पर कामचटका ज्वालामुखी विस्फोट दल (KVERT) और रूसी आपातकालीन मंत्रालय की पैनी नजर है, जो लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

जनजीवन पर कोई सीधा असर नहीं, पर हवाई यात्रा के लिए खतरा:
हालांकि, राहत की बात यह है कि ज्वालामुखी विस्फोट का सीधा असर किसी भी आबादी वाले क्षेत्र पर नहीं पड़ा है। राख का बादल प्रशांत महासागर की ओर फैल रहा है, और किसी भी बसे हुए इलाके में राख गिरने की कोई खबर नहीं है। फिर भी, हवाई यात्रा के लिए यह स्थिति अत्यंत खतरनाक है, जिसके कारण नारंगी कोड जारी किया गया है।

ज्वालामुखी की संरचना और पिछली गतिविधियां:
वैज्ञानिकों के अनुसार, क्रशेनिकोव ज्वालामुखी के दक्षिणी शंकु का निर्माण लगभग 11,000 साल पहले शुरू हुआ था और यह 4,500 वर्षों तक चला। इसके बाद उत्तरी शंकु का निर्माण हुआ। दोनों शंकुओं के अंदर 800-900 मीटर चौड़े गड्ढे हैं। यह एक स्ट्रैटोज्वालामुखी है, जो पिछले 10,000 वर्षों में कम से कम 31 बार फूट चुका है। 1550 के आसपास के आखिरी विस्फोट की भी कुछ रिपोर्टें हैं, हालांकि 600 साल की अवधि को लेकर कुछ भिन्नता है, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह एक अत्यंत दुर्लभ घटना है।